चित्रा

उनकी वाणी में शंख की ध्वनि है 
हथेली पर आलता की लाली है
पैरो में मृदंग की थाप
और आँखों में लौ का तेज़ है 
हर रूप में चित्र है उसका 
फिर भी नाम है उसके अनेक।

BRIJ BARI

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