निलाद्री

नीले आसमान में छिटकती चाँदनी सा उसका प्रतीक है 
फूलो की महक में लिपटा हुआ प्रतिबिम्ब 
विलीन है अपनी ही दुनिया में वो 
अपने सपनों और उम्मीदों में पाया है उसने अपना अस्तित्व

BRIJ BARI

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